श्रीराम के सोलह गुण, जो हममें होने चाहिए
वाल्मीकि रामायण में श्रीराम के ऐसे ही सोलह गुण बताए गए हैं, जो लोगों में नेतृत्व क्षमता बढ़ाने व किसी भी क्षेत्र में अगुवाई करने के अहम सूत्र हैं।
1 गुणवान (ज्ञानी व हुनरमंद)
2 किसी की निंदा न करने वाला (सकारात्मक)
3 धर्मज्ञ (धर्म के साथ प्रेम, सेवा और मदद करने वाला)
4 कृतज्ञ (विनम्रता और अपनत्व से भरा)
5 सत्य (सच बोलने वाला, ईमानदार)
6 दृढ़प्रतिज्ञ (मजबूत हौंसले वाला)
7 सदाचारी (अच्छा व्यवहार, विचार)
8सभी प्राणियों का रक्षक (मददगार)
9 विद्वान (बुद्धिमान और विवेक शील)
10 सामथ्र्यशाली (सभी का भरोसा, समर्थन पाने वाला)
11 प्रियदर्शन (खूबसूरत)
12 मन पर अधिकार रखने वाला (धैर्यवान व व्यसन से मुक्त)
13 क्रोध जीतने वाला (शांत और सहज)
14 कांतिमान (अच्छा व्यक्तित्व)
16 वीर्यवान (स्वस्थ्य, संयमी और हष्ट-पुष्ट)
Ayodhya |
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